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कोरियाई वाक्य-क्रम: क्रिया आख़िर में — पर हिंदी जैसी नहीं

कर्ता – कर्म – क्रिया आपके लिए नया नहीं है। असली काम यह जानना है कि कोरियाई इसी ढाँचे से कहाँ अलग हो जाता है।

इस पन्ने पर
  1. क्रिया आख़िर में — यहाँ तक सब जाना-पहचाना है
  2. अंत तक अर्थ पक्का नहीं होता
  3. क्रिया छोड़कर बाक़ी सब हिल सकता है
  4. निषेध की दो जगहें — और एक जगह हिंदी आपको मुफ़्त में सही करा देती है
  5. विशेषण-वाक्यांश संज्ञा से पहले — यहाँ हिंदी आधी मदद करती है
  6. कर्ता ग़ायब हो जाता है
  7. तीन आदतें जो छोड़नी हैं
  8. यह आदत कैसे बनती है

क्रिया आख़िर में — यहाँ तक सब जाना-पहचाना है

हिंदी भी कर्ता – कर्म – क्रिया है: मैं खाना खाता हूँ। कोरियाई वही क्रम रखता है, इसलिए वह पहली दीवार जिस पर अंग्रेज़ी वाले महीनों अटकते हैं, आपके सामने है ही नहीं। लिखित कोरियाई में क्रिया कभी नहीं हिलती; बोलचाल में बाद की सूझी बात पीछे जुड़ जाती है (밥 먹었어, 나는), जैसे आप कहते हैं खा लिया मैंने।

저는 밥을 먹어요.मैं खाना खाता हूँ। — शब्द-दर-शब्द भी वही क्रम
저는 어제 친구를 만났어요.मैं कल दोस्त से मिला। — मैं – कल – दोस्त – मिला
먹었어요?खाना खाया? — कोई शब्द नहीं जुड़ा; लिखा हुआ वाक्य कथन जैसा ही है

यह आख़िरी उदाहरण पहला असली फ़र्क़ है। हिंदी सवाल के आगे अक्सर क्या रख देती है, इसलिए पहले ही शब्द में पता चल जाता है। 해요 शैली में कोरियाई कुछ नहीं जोड़ता: कथन और प्रश्न में शब्द वही रहते हैं — लिखने में प्रश्नचिह्न और बोलने में स्वर-आरोह फ़ैसला करता है। प्रश्नवाचक शब्द ज़रूर आपकी तरह क्रिया से पहले रहता है — 어디 가요?

अंत तक अर्थ पक्का नहीं होता

हिंदी में भी काल आख़िर में बैठता है — खाता हूँ, खाया, खाऊँगा — इसलिए इंतज़ार करना नया नहीं। पर दो चीज़ें हिंदी पहले खोल देती है और कोरियाई देर से: शिष्टता, और निषेध का लंबा रूप -지 않다।

저는 밥을 먹었어요.मैंने खाना खाया।
저는 밥을 먹지 않았어요.मैंने खाना नहीं खाया। — आपका नहीं क्रिया से पहले आता है, यह रूप क्रिया के बाद
저는 밥을 먹을 거예요.मैं खाना खाऊँगा

तीनों वाक्यों के पहले पाँच अक्षर एक जैसे हैं। शिष्टता का हाल और तीखा है: हिंदी उसे पहले ही शब्द में खोल देती है — आप, तुम, तू। कोरियाई सर्वनाम छोड़ देता है और भार आख़िरी अक्षरों पर डालता है: 갔어 · 갔어요 · 갔습니다 एक ही बात हैं, बस सुनने वाले से रिश्ता अलग है।

क्रिया छोड़कर बाक़ी सब हिल सकता है

यह भी आपके लिए जाना-पहचाना है। हिंदी में परसर्ग हर संज्ञा की भूमिका पकड़े रहते हैं, इसलिए आप शब्दों को आगे-पीछे कर लेते हैं और वाक्य टूटता नहीं। कोरियाई कण ठीक यही काम करते हैं, और वहाँ भी क्रम ज़ोर का मामला बन जाता है, सही-ग़लत का नहीं।

저는 어제 친구를 만났어요.तटस्थ क्रम
어제 저는 친구를 만났어요.कल — ज़ोर समय पर
친구를 저는 어제 만났어요.दोस्त से — ज़ोर इस बात पर कि किससे

तीनों सही हैं और अर्थ एक। 를 की वजह से 친구 जहाँ भी जाए, कर्म ही रहता है — बिलकुल आपके को और से की तरह। एक फ़र्क़: हिंदी का ने काल के साथ आता-जाता है और का/की/के लिंग-वचन से बदलते हैं। कोरियाई कण न काल से बदलते हैं, न लिंग से।

जो आज़ाद नहीं है, वह यह कि कौन-सी क्रिया कौन-सा कण माँगती है। यह जोड़ी तय है, आपके परसर्ग से नहीं निकलती — और पहला ही उदाहरण मेल नहीं खाता।

친구 만나요.मैं दोस्त से मिलता हूँ। — हिंदी में से, कोरियाई में कर्म का 를
버스 타요.मैं बस पकड़ता हूँ। — हिंदी में या तो कुछ नहीं, या में; कोरियाई में फिर 를
한국어 잘해요.मुझे कोरियाई अच्छी आती है। — हिंदी में भाषा कर्ता है, कोरियाई में कर्म
의사 됐어요.मैं डॉक्टर बन गया। — हिंदी डॉक्टर को नंगा छोड़ती है; 되다 को 가 चाहिए, 를 कभी नहीं
학생 아니에요.मैं छात्र नहीं हूँ। — यहाँ भी हिंदी नंगा छोड़ती है; 아니다 को 이/가 चाहिए

निषेध की दो जगहें — और एक जगह हिंदी आपको मुफ़्त में सही करा देती है

हिंदी में निषेध की एक ही जगह है: नहीं, क्रिया से ठीक पहले। कोरियाई में दो हैं और अर्थ लगभग एक। क्रिया से पहले आता है — ठीक आपकी जगह पर — और बोलचाल में यही सुनाई देता है; -지 않다 धातु के बाद जुड़ता है और औपचारिक की ओर झुकता है। हिंदी में इसका जोड़ नहीं, इसलिए नया काम यही है।

먹어요.मैं नहीं खाता। — छोटा रूप, रोज़ की बोली, नहीं वाली ही जगह
지 않아요.मैं नहीं खाता। — लंबा रूप, थोड़ा औपचारिक
가요.मैं नहीं जा सकता। — क्षमता का अभाव, अनिच्छा नहीं

यानी नहीं और यानी नहीं … सकता — यह बँटवारा हिंदी में पहले से है। आज्ञा भी मेल खाती है: मत जाइए यानी 가지 마세요। और जिस जगह अंग्रेज़ी वाले सबसे फिसलते हैं — संज्ञा + 하다 में 안 अंदर जाता है — वहाँ आप बिना सोचे सही रहेंगे, क्योंकि हिंदी भी यही करती है।

공부 해요.मैं नहीं पढ़ता। — हिंदी भी पढ़ाई नहीं करता कहती है: निषेध संज्ञा और करना के बीच। 안 공부해요 ग़लत है
해요.मैं काम नहीं करता।
좋아해요.मुझे पसंद नहीं। — 좋아하다 एक ही शब्द है, इसलिए 안 बाहर रहता है
공부하지 않아요.लंबा रूप कभी नहीं टूटता — हमेशा सुरक्षित

तीन क्रियाएँ निषेध लेने के बजाय पूरी बदल जाती हैं안 있다 जैसा कुछ नहीं होता, हिंदी इनमें से दो में बस नहीं जोड़ देती है, पर तीसरे का उल्टा वहाँ भी अलग शब्द है — बेस्वाद — इसलिए ये कोरियाई जोड़े याद करने पड़ेंगे।

있다 → 없다है → नहीं है
알다 → 모르다जानना → न जानना
맛있다 → 맛없다स्वादिष्ट → बेस्वाद

못 का लंबा रूप -지 못하다 है, जो क्रिया के बाद बैठता है। 가지 못해요 वही है जो 못 가요 — और लंबे रूप में 하다 वाला टूटना ग़ायब हो जाता है।

विशेषण-वाक्यांश संज्ञा से पहले — यहाँ हिंदी आधी मदद करती है

आपकी सबसे आम बनावट जो … वह है, जिसमें वर्णन संज्ञा के आसपास फैल जाता है। पर हिंदी के पास संज्ञा से पहले बैठने वाले रूप भी हैं — कल पढ़ी हुई किताब, बग़ल में रहने वाला आदमी — और कोरियाई हमेशा यही करता है, बिना दूसरे विकल्प के।

제가 어제 읽은कल मेरी पढ़ी हुई किताब — मैं – कल – पढ़ी – किताब
옆집에 사는 사람बग़ल के घर में रहने वाला आदमी — आपका वाला ठीक इसी जगह बैठता है
बड़ा घर — विशेषण भी पहले, हिंदी की तरह

पर एक चीज़ उलटी है। हिंदी कृदंत लिंग-वचन से बदलता है — पढ़ा हुआ पत्र, पढ़ी हुई किताब। कोरियाई का 읽은 लिंग नहीं, काल बताता है: 읽은 बीता, 읽는 चलता, 읽을 आने वाला। जिस खाने में आप लिंग भरते हैं, कोरियाई उसमें समय भरता है।

संज्ञा से पहले लंबा हिस्सा दिखे तो वह उसी का वर्णन है — पहले संज्ञा पढ़िए, फिर पीछे लौटिए। इसका अलग पन्ना है।

कर्ता ग़ायब हो जाता है

कोरियाई वह सब गिरा देता है जो संदर्भ से मिल जाए — सबसे ज़्यादा कर्ता। आप यह पहले से करते हैं: खाना खाया? — हाँ, खा लिया। फिर भी किताब से सीखने वाले हर वाक्य में 저는 जोड़ते रहते हैं, जो अजीब ज़ोर जैसा लगता है।

밥 먹었어요?(आपने) खाना खाया?
네, 먹었어요.हाँ, (मैंने) खा लिया।
어디 가요?(आप) कहाँ जा रहे हैं?

एक फ़र्क़: हिंदी में कर्ता गिरने पर भी क्रिया का मेल अक्सर बता देता है कि बात किसकी है — चला गया बनाम चली गई। (खाया बनाम खाई नहीं — पूर्ण काल में मेल कर्म से होता है।) कोरियाई क्रिया किसी से मेल नहीं खाती, इसलिए वहाँ सिर्फ़ संदर्भ बचता है।

तीन आदतें जो छोड़नी हैं

यह आदत कैसे बनती है

पढ़ने में मन-ही-मन क्रम ठीक करने का समय मिल जाता है; सुनने में नहीं। शैडोइंग आपसे कोरियाई क्रम को कोरियाई रफ़्तार पर बुलवाती है — यही एक रास्ता है जिससे यह हिसाब लगाने के बजाय अपने आप होने लगे।

शुरुआत ऐसे छोटे वाक्यों से कीजिए जिनका अर्थ अंत बदल देता है, और उन्हें तब तक बोलिए जब तक साँचा अपना न लगने लगे।

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