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कोरियाई कृदंत-उपवाक्य 읽은 책, 읽는 책, 읽을 책 — «जो» यहाँ नहीं है

हिंदी के पास दो रास्ते हैं — «वह किताब जो मैंने पढ़ी» और «पढ़ी हुई किताब»; कोरियाई सिर्फ़ दूसरा जानता है, और काल क्रिया के अंत में बैठता है।

इस पन्ने पर
  1. संज्ञा हमेशा आख़िर में
  2. क्रिया के तीन रूप — -던 के साथ चार
  3. विशेषण का एक ही रूप — और वह टकराता है
  4. 있다 और 없다 विशेषण का नियम तोड़ते हैं
  5. -는 것 उपवाक्य को संज्ञा बना देता है
  6. लंबा उपवाक्य: यहाँ हिंदी कृदंत साथ छोड़ देता है
  7. पाँच ग़लतियाँ याद कर लेने लायक़

संज्ञा हमेशा आख़िर में

हिंदी में दो रास्ते हैं: «वह किताब जो मैंने कल पढ़ी» और «कल पढ़ी हुई किताब»। कोरियाई सिर्फ़ दूसरा जानता है: 제가 어제 읽은 — पूरा उपवाक्य संज्ञा से पहले, और जो कहीं नहीं। संज्ञा से सटी क्रिया एक ख़ास प्रत्यय लेती है, और काल उसी प्रत्यय में रहता है

제가 어제 읽은वह किताब जो मैंने कल पढ़ी — शब्दक्रम में «मेरी कल पढ़ी हुई किताब»
책 제가 어제 읽은 — उपवाक्य कभी संज्ञा के बाद नहीं आता

क्रिया के तीन रूप — -던 के साथ चार

-(으)ㄴ भूत, -는 वर्तमान, -(으)ㄹ भविष्य या कल्पना। व्यंजन के बाद 은/을, स्वर के बाद ㄴ/ㄹ: 보다 → 본 / 보는 / 볼। ㄹ पर ख़त्म होने वाली धातु अपना ㄹ गिरा देती है और स्वरांत जैसा बर्ताव करती है: 살다 → 산 / 사는 / 살, 만들다 → 만든 / 만드는 / 만들 — 살은 कभी नहीं।

वह किताब जो मैंने पढ़ी — ≈ «पढ़ी हुई»
वह किताब जो मैं पढ़ रहा हूँ — «पढ़ता हुआ» पढ़ने वाले का वर्णन करेगा, किताब का नहीं
वह किताब जो मैं पढ़ूँगा — «पढ़ने वाली किताब» क़रीब है, पर उसमें «पढ़ने लायक़» का रंग है, साफ़ भविष्य का नहीं
वह किताब जो मैं पहले पढ़ा करता था — अधूरा या आदत वाला भूत

एक राहत: हिंदी कृदंत लिंग-वचन से बदलता है — पढ़ी हुई किताब, पढ़ा हुआ पत्र। कोरियाई रूप कभी नहीं बदलता — 읽은 책 हो या 읽은 편지, प्रत्यय वही रहता है।

विशेषण का एक ही रूप — और वह टकराता है

कोरियाई विशेषण ख़ुद क्रिया की तरह चलता है: 이 책이 좋아요 «यह किताब अच्छी है» — कोई है नहीं, विशेषण ही विधेय है। इसीलिए संज्ञा से पहले वह भी प्रत्यय लेता है, पर सिर्फ़ -(으)ㄴ: जहाँ क्रिया के तीन रूप हैं, वहाँ इसका एक। -(으)ㄹ और -던 इसके भी बनते हैं (어려울 때, 좋을 거예요); अलग वर्तमान नहीं होता।

예쁘다 → 예쁜 사람सुंदर व्यक्ति
좋다 → 좋은अच्छी किताब
크다 → बड़ा घर
작다 → 작은छोटा कमरा

एक ही प्रत्यय: क्रिया पर भूत, विशेषण पर वर्तमान। इसे तर्क से नहीं निकाला जा सकता — यही सबसे पहले जान लेने की चीज़ है।

사람भूत — वह आदमी जिसने खा लिया: 먹다 क्रिया है
사람वर्तमान — जवान आदमी: 젊다 विशेषण है

있다 और 없다 विशेषण का नियम तोड़ते हैं

बाक़ी हर जगह ये विशेषण जैसे चलते हैं, पर संज्ञा से पहले -는 लेते हैं। यह पूरे 있다/없다 परिवार पर लागू है, जो बड़ा है और रोज़ चलता है: 맛있다 «स्वादिष्ट» और 재미있다 «मज़ेदार» के भीतर 있다 छिपा है।

맛있 음식स्वादिष्ट खाना
재미있 영화मज़ेदार फ़िल्म
사람वह आदमी जो वहाँ नहीं है
맛있 · 예쁘 — दोनों ग़लत: 있다 는 लेता है, 예쁘다 ㄴ लेता है

-는 것 उपवाक्य को संज्ञा बना देता है

किसी भी कृदंत रूप के बाद 것 लगाइए, पूरा उपवाक्य संज्ञा बन जाता है — इसी तरह कोरियाई «खाना», «जो मैं चाहता हूँ वह» कहता है। हिंदी यही बात दो तरह से कहती है — क्रियार्थक संज्ञा से («खाना पसंद है») या «जो … वह» से — और 것 अकेला दोनों की जगह भरता है: यह सर्वनाम नहीं, उपवाक्य के बाद लगने वाली संज्ञा है। बोलचाल में 것 सिकुड़कर 거 हो जाता है और कणों में घुल जाता है।

는 것을 좋아해요.मुझे खाना पसंद है
는 거 좋아해요.वही वाक्य, बोलचाल में
한국어 배우는 게 재미있어요.कोरियाई सीखना मज़ेदार है — 것이 → 게
제가 원하는 건 이거예요.जो मैं चाहता हूँ वह यह है — 것은 → 건

लंबा उपवाक्य: यहाँ हिंदी कृदंत साथ छोड़ देता है

हिंदी कृदंत सिर्फ़ कर्ता («सोता हुआ बच्चा») या कर्म («पढ़ी हुई किताब») ले पाता है; जगह और समय के लिए जहाँ, जब चाहिए। कोरियाई रूप हर भूमिका संभाल लेता है — खाली जगह ख़ुद बता देती है कि संज्ञा उपवाक्य के भीतर क्या थी। उपवाक्य का अपना कर्ता भी होता है। कड़ी के आख़िर में संज्ञा ढूँढ़िए और उलटा पढ़िए।

제가 일하는 공장वह कारख़ाना जहाँ मैं काम करता हूँ — हिंदी कृदंत से यह नहीं कहा जा सकता
친구를 처음 만난वह दिन जब मैं दोस्त से पहली बार मिला
어제 친구가 준 선물वह तोहफ़ा जो कल दोस्त ने दिया

आख़िरी उदाहरण में 친구가 उपवाक्य का कर्ता है, पूरे वाक्य का नहीं। यहीं शुरुआती लोग धागा खो देते हैं: कर्ता का कण 이/가 उपवाक्य के भीतर है, फिर भी 친구가 पूरे वाक्य का कर्ता लगने लगता है।

पाँच ग़लतियाँ याद कर लेने लायक़

यही शुरुआती और मध्यवर्ती स्तर के बीच की दीवार है, और वह पढ़ने से नहीं, सुनने से गिरती है। बोलचाल का कोई भी सेट 읽은/읽는/읽을 दर्जनों बार देगा — फ़र्क़ इसी तरह बैठता है।

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